यह पवित्र स्तोत्र जगन्माता श्री ललिता त्रिपुरसुन्दरी की एक हजार नामों से स्तुति करता है। हर नाम माँ की करुणा, शक्ति, ज्ञान और सौन्दर्य का स्मरण कराता है।
श्रीललितासहस्रनामम्
देवताश्री ललिता त्रिपुरसुन्दरी
मूल परम्पराब्रह्माण्ड पुराण परम्परा
पारंपरिक स्रोतब्रह्माण्ड पुराण में हयग्रीव और अगस्त्य के संवाद से जुड़ी ललिता-उपासना परम्परा।
पारायण
परम्परा में इसका प्रयोग
स्वच्छ स्थान पर दीप जलाकर माँ का ध्यान करें और श्रद्धा से पढ़ें। पूरा पाठ लम्बा लगे तो इसे भागों में किया जा सकता है।
इन पृष्ठों पर निजी भक्ति के लिए पारम्परिक संस्कृत पाठ दिए गए हैं। अर्थ सरल, मौलिक सार हैं। यह विकसित होता संग्रह है; यह TTD का आधिकारिक पाठ या किसी वेद-शाखा का प्रामाणिक संस्करण नहीं है।
इस पृष्ठ को TTD, भारतीय रेल, सारेगामा, किसी गायक या रिकॉर्डिंग संस्था की स्वीकृति न माना जाए।
अलीपुरद्वार जंक्शन के स्थानीय रेलवे समुदाय और स्थानीय भक्तों की सामूहिक श्रद्धा से स्थापित।