यह पवित्र प्रभात-स्तुति भगवान वेंकटेश्वर को जगाकर समस्त जगत के मंगल की प्रार्थना करती है। यहाँ सुप्रभातम्, स्तोत्रम्, प्रपत्ति और मंगलाशासनम् क्रम से दिए गए हैं।
श्रीवेङ्कटेश्वर सुप्रभातम्
देवताश्री वेंकटेश्वर स्वामी
मूल परम्पराश्रीवैष्णव परम्परा
पारंपरिक स्रोतश्री प्रतिवादिभयंकरम् अन्नन् द्वारा रचित चार भागों वाला पारम्परिक प्रातःकालीन पाठ।
पारायण
सम्पूर्ण प्रातःकालीन पाठ-क्रम
श्री वेंकटेश्वर के प्रचलित प्रातःकालीन पाठ में चार भाग हैं—सुप्रभातम्, स्तोत्रम्, प्रपत्ति और मंगलाशासनम्।
शान्त मन से बैठें और सम्भव हो तो दीप जलाएँ। प्रत्येक श्लोक को बिना जल्दबाजी, श्रद्धा के साथ पढ़ें। अधिकृत गायन सुनते हुए भी पाठ का अनुसरण किया जा सकता है।
इन पृष्ठों पर निजी भक्ति के लिए पारम्परिक संस्कृत पाठ दिए गए हैं। अर्थ सरल, मौलिक सार हैं। यह विकसित होता संग्रह है; यह TTD का आधिकारिक पाठ या किसी वेद-शाखा का प्रामाणिक संस्करण नहीं है।
इस पृष्ठ को TTD, भारतीय रेल, सारेगामा, किसी गायक या रिकॉर्डिंग संस्था की स्वीकृति न माना जाए।
अलीपुरद्वार जंक्शन के स्थानीय रेलवे समुदाय और स्थानीय भक्तों की सामूहिक श्रद्धा से स्थापित।